सुन्दरकाण्ड · दोहा 56 (क) · दोहा/सोरठा
बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस।
बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस।
राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस।।56(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.56 · पुस्तक पृ. 764, 765
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस।
मूर्ख! केवल बातों से अपना मन बहलाकर अपने कुल को नष्ट मत कर।
English explanation
Fool! Do not destroy your lineage by reassuring yourself with mere words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बातन्ह | बातों से | with words |
| मनहि | अपने मन को | your own mind |
| रिझाइ | बहलाकर | having gratified or reassured |
| सठ | हे मूर्ख | you fool |
| जनि | मत | do not |
| घालसि | तू डाल, पहुँचा | cast, consign |
| कुल | अपने वंश को | your lineage |
| खीस | नाश में | to ruin |
2 राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस।।56(क)।।
राम का विरोध करके तू विष्णु, ब्रह्मा या शिव की शरण में भी नहीं बच सकेगा।
English explanation
By opposing Rama, you will not escape even under the protection of Vishnu, Brahma, or Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम का | Rama |
| बिरोध | विरोध करके | by opposing |
| न | नहीं | not |
| उबरसि | तू बच सकेगा | will you escape |
| सरन | शरण में भी | even in the refuge of |
| बिष्नु | भगवान विष्णु | Vishnu |
| अज | अजन्मा ब्रह्मा | Brahma, the unborn creator |
| ईस | भगवान शिव | Shiva |
| क | दोहा ५६ का संदर्भ-चिह्न ‘क’ | reference marker ‘क’ for verse 56 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 56 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 5.56
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 764, 765
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।