सुन्दरकाण्ड · दोहा 49 (ख) · दोहा/सोरठा
जो संपति सिव रावनहि दीन्हि दिएँ दस माथ।
जो संपति सिव रावनहि दीन्हि दिएँ दस माथ।
सोइ संपदा बिभीषनहि सकुचि दीन्ह रघुनाथ।।49(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.49 · पुस्तक पृ. 758, 759
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 जो संपति सिव रावनहि दीन्हि दिएँ दस माथ।
जो संपत्ति शिव ने रावण को उसके दस सिर अर्पित करने पर दी थी—
English explanation
The wealth that Shiva gave Ravana upon his offering his ten heads—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | which |
| संपति | संपत्ति; वैभव | wealth; prosperity |
| सिव | भगवान शिव ने | Lord Shiva |
| रावनहि | रावण को | to Ravana |
| दीन्हि | दी थी | gave |
| दिएँ | अर्पित करने पर | upon offering |
| दस | दस | ten |
| माथ | सिर | heads |
2 सोइ संपदा बिभीषनहि सकुचि दीन्ह रघुनाथ।।49(ख)।।
वही संपदा रघुनाथ ने विभीषण को संकोच के साथ दी।
English explanation
That very wealth Rama, lord of the Raghu lineage, gave Vibhishana with a sense of diffidence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that very |
| संपदा | संपत्ति; वैभव | wealth; prosperity |
| बिभीषनहि | विभीषण को | to Vibhishana |
| सकुचि | संकोच करके | with diffidence |
| दीन्ह | दी | gave |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of the Raghu lineage |
| ख | दोहा 49 का संदर्भ-चिह्न (ख) | reference marker (ख) for verse 49 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 49 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 5.49
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 758, 759
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।