सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभगवान्का जन (सेवक) जानकर अत्यन्त गाढ़ी प्रीति हो गयी। नेत्रोंमें [प्रेमाश्रुओंका] जल भर आया और शरीर अत्यन्त पुलकित हो गया। [सीताजीने कहा—] हे तात हनुमान्! विरहसागरमें डूबती हुई मुझको तुम जहाज हुए॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 727 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी।।
बूड़त बिरह जलधि हनुमाना। भयउ तात मों कहुँ जलजाना।।
स्रोत अभिलेख 5.14 · पुस्तक पृ. 727, 728
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी।।
English explanation
Recognizing Hanuman as a devotee of the Lord, Sita felt deep affection. Her eyes filled with tears, and her body thrilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरिजन | भगवान का भक्त—हनुमान | a devotee of the Lord—Hanuman |
| जानि | जानकर | recognizing |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| अति | अत्यंत | very |
| गाढ़ी | गहरी हुई | became deep |
| सजल | आँसुओं से भरे | tear-filled |
| नयन | नेत्र | eyes |
| पुलकावलि | रोमांच की पंक्ति | ripples of goosebumps |
| बाढ़ी | बढ़ गई | increased |
2 बूड़त बिरह जलधि हनुमाना। भयउ तात मों कहुँ जलजाना।।
English explanation
O Hanuman, dear one! For me, drowning in the ocean of separation, you have become a ship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूड़त | डूबती हुई | drowning |
| बिरह | वियोग का | of separation |
| जलधि | समुद्र | ocean |
| हनुमाना | हे हनुमान | O Hanuman |
| भयउ | हो गए | have become |
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| मों | मेरे | me |
| कहुँ | लिए | for |
| जलजाना | जलयान; जहाज | a ship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 727
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 727, 728
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।