सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्याम सरोज दाम सम सुंदर। प्रभु भुज करि कर सम दसकंधर।।
मूल पाठ
स्याम सरोज दाम सम सुंदर। प्रभु भुज करि कर सम दसकंधर।।
सो भुज कंठ कि तव असि घोरा। सुनु सठ अस प्रवान पन मोरा।।
स्रोत अभिलेख 5.1 · पुस्तक पृ. 723, 724
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[सीताजीने कहा—] हे दशग्रीव! प्रभुकी भुजा जो श्याम कमलकी मालाके समान सुन्दर और हाथीकी सूँड़के समान [पुष्ट तथा विशाल] है, या तो वह भुजा ही मेरे कण्ठमें पड़ेगी या तेरी भयानक तलवार ही। रे शठ! सुन, यही मेरा सच्चा प्रण है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 723 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 स्याम सरोज दाम सम सुंदर। प्रभु भुज करि कर सम दसकंधर।।
English explanation
O ten-headed Ravana, my lord Rama’s arms are beautiful like a garland of dark lotuses and resemble an elephant’s trunk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्याम | श्याम रंग के | dark-hued |
| सरोज | कमलों की | of lotuses |
| दाम | माला | garland |
| सम | के समान | like |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| करि | हाथी की | of an elephant |
| कर | सूँड़ | trunk |
| सम | के समान | like |
| दसकंधर | हे दशमुख रावण | O ten-headed Ravana |
2 सो भुज कंठ कि तव असि घोरा। सुनु सठ अस प्रवान पन मोरा।।
English explanation
Either those arms will embrace my neck or your terrible sword will strike it. Listen, fool: this is my firm resolve.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वे ही | those very |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| कंठ | गले में | around my neck |
| कि | या | or |
| तव | तेरी | your |
| असि | तलवार | sword |
| घोरा | भयानक | terrible |
| सुनु | सुन | listen |
| सठ | हे मूर्ख | O fool |
| अस | ऐसी | such |
| प्रवान | निश्चित और दृढ़ | definite and firm |
| पन | प्रतिज्ञा | vow |
| मोरा | मेरी | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 723
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दु:खी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 723, 724
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।