सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो मनु सदा रहत तोहि पाहीं। जानु प्रीति रसु एतेनहि माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर वह मन सदा तेरे ही पास रहता है। बस, मेरे प्रेमका सार इतनेमें ही समझ ले। प्रभुका सन्देश सुनते ही जानकीजी प्रेममें मग्र हो गयीं। उन्हें शरीरकी सुध न रही॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 728 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो मनु सदा रहत तोहि पाहीं। जानु प्रीति रसु एतेनहि माहीं।।
प्रभु संदेसु सुनत बैदेही। मगन प्रेम तन सुधि नहिं तेही।।
स्रोत अभिलेख 5.15 · पुस्तक पृ. 728, 728
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो मनु सदा रहत तोहि पाहीं। जानु प्रीति रसु एतेनहि माहीं।।
English explanation
That heart always remains with you; understand the depth of my love from this alone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| मनु | मन | heart; mind |
| सदा | सदा | always |
| रहत | रहता है | remains |
| तोहि | तुम्हारे | you |
| पाहीं | पास | with; near |
| जानु | समझ लो | understand |
| प्रीति | प्रेम का | of love |
| रसु | रस; गहरी अनुभूति | essence; felt depth |
| एतेनहि | इतने ही में; इसी बात में | in this alone |
| माहीं | में | in |
2 प्रभु संदेसु सुनत बैदेही। मगन प्रेम तन सुधि नहिं तेही।।
English explanation
Hearing Lord Rama’s message, Sita became absorbed in love and lost awareness of her own body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम का | Lord Rama’s |
| संदेसु | संदेश | message |
| सुनत | सुनते ही | upon hearing |
| बैदेही | सीता, विदेह की राजकुमारी | Sita, princess of Videha |
| मगन | मग्न; डूबी हुई | absorbed |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| तन | शरीर की | of the body |
| सुधि | सुध; चेतना | awareness |
| नहिं | नहीं | not |
| तेही | उन्हें | to her |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 728
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 728, 728
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।