सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेहू तें कछु दुख घटि होई। काहि कहौं यह जान न कोई।।
मूल पाठ
कहेहू तें कछु दुख घटि होई। काहि कहौं यह जान न कोई।।
तत्व प्रेम कर मम अरु तोरा। जानत प्रिया एकु मनु मोरा।।
स्रोत अभिलेख 5.15 · पुस्तक पृ. 728, 728
भावार्थ
मूल पाठ के बादमनका दु:ख कह डालनेसे भी कुछ घट जाता है। पर कहूँ किससे? यह दु:ख कोई जानता नहीं। हे प्रिये! मेरे और तेरे प्रेमका तत्त्व (रहस्य) एक मेरा मन ही जानता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 728 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहेहू तें कछु दुख घटि होई। काहि कहौं यह जान न कोई।।
English explanation
Speaking of sorrow lessens it somewhat; but whom can I tell? No one understands it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेहू | कहने | speaking of it |
| तें | से | through; by |
| कछु | कुछ | somewhat |
| दुख | दुख | sorrow |
| घटि | घटकर | lessened |
| होई | हो जाता है | becomes |
| काहि | किससे | to whom |
| कहौं | मैं कहूँ | shall I tell |
| यह | इस दुख को | this sorrow |
| जान | जानता है | understands |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई | anyone |
2 तत्व प्रेम कर मम अरु तोरा। जानत प्रिया एकु मनु मोरा।।
English explanation
Beloved, only my own heart knows the true nature of the love between you and me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तत्व | वास्तविक स्वरूप; सार | true nature; essence |
| प्रेम | प्रेम | love |
| कर | का | of |
| मम | मेरा | my |
| अरु | और | and |
| तोरा | तुम्हारा | your |
| जानत | जानता है | knows |
| प्रिया | हे प्रिये | O beloved |
| एकु | केवल एक | one alone |
| मनु | मन | heart; mind |
| मोरा | मेरा | mine |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 728
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 728, 728
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