सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुबलय बिपिन कुंत बन सरिसा। बारिद तपत तेल जनु बरिसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर कमलोंके वन भालोंके वनके समान हो गये हैं। मेघ मानो खौलता हुआ तेल बरसाते हैं। जो हित करनेवाले थे, वे ही अब पीड़ा देने लगे हैं। त्रिविध (शीतल, मन्द, सुगन्ध) वायु साँपके श्वासके समान (जहरीली और गरम) हो गयी है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 728 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कुबलय बिपिन कुंत बन सरिसा। बारिद तपत तेल जनु बरिसा।।
जे हित रहे करत तेइ पीरा। उरग स्वास सम त्रिबिध समीरा।।
स्रोत अभिलेख 5.15 · पुस्तक पृ. 728, 728
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कुबलय बिपिन कुंत बन सरिसा। बारिद तपत तेल जनु बरिसा।।
English explanation
Groves of blue lotuses seem like forests of spears; clouds seem to rain scorching oil.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुबलय | नीलकमलों का | of blue lotuses |
| बिपिन | वन; समूह | grove; mass |
| कुंत | भालों का | of spears |
| बन | वन | forest |
| सरिसा | के समान | like |
| बारिद | बादल | clouds |
| तपत | तपता हुआ | scorching |
| तेल | तेल | oil |
| जनु | मानो | as though |
| बरिसा | बरसाते हैं | rain down |
2 जे हित रहे करत तेइ पीरा। उरग स्वास सम त्रिबिध समीरा।।
English explanation
What once brought comfort now causes pain; the breeze with its three pleasing qualities feels like a serpent’s breath.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | those which |
| हित | हितकारी; सुखदायी | beneficial; comforting |
| रहे | पहले थे | used to be |
| करत | देते हैं | cause |
| तेइ | वे ही | those very things |
| पीरा | पीड़ा | pain |
| उरग | साँप की | a serpent’s |
| स्वास | साँस | breath |
| सम | के समान | like |
| त्रिबिध | तीन गुणों वाली | having three qualities |
| समीरा | हवा | breeze |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 728
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 728, 728
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।