सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेउ राम बियोग तव सीता। मो कहुँ सकल भए बिपरीता।।
मूल पाठ
कहेउ राम बियोग तव सीता। मो कहुँ सकल भए बिपरीता।।
नव तरु किसलय मनहुँ कृसानू। कालनिसा सम निसि ससि भानू।।
स्रोत अभिलेख 5.15 · पुस्तक पृ. 728, 728
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[हनुमान्जी बोले—] श्रीरामचन्द्रजीने कहा है कि हे सीते! तुम्हारे वियोगमें मेरे लिये सभी पदार्थ प्रतिकूल हो गये हैं। वृक्षोंके नये-नये कोमल पत्ते मानो अग्रिके समान, रात्रि कालरात्रिके समान, चन्द्रमा सूर्यके समान॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 728 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहेउ राम बियोग तव सीता। मो कहुँ सकल भए बिपरीता।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Rama said, ‘Sita, in separation from you, everything has become adverse to me.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेउ | कहा | said |
| राम | राम ने | Rama |
| बियोग | वियोग में | in separation |
| तव | तुम्हारे | from you |
| सीता | हे सीता | O Sita |
| मो | मेरे | me |
| कहुँ | लिए | for |
| सकल | सब कुछ | everything |
| भए | हो गया है | has become |
| बिपरीता | विपरीत; दुखदायी | adverse; distressing |
2 नव तरु किसलय मनहुँ कृसानू। कालनिसा सम निसि ससि भानू।।
English explanation
The trees’ tender new leaves seem like fire; night is like the night of cosmic destruction, and the moon like the sun.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नव | नए | new |
| तरु | वृक्षों के | of trees |
| किसलय | कोमल पत्ते | tender shoots and leaves |
| मनहुँ | मानो | as though |
| कृसानू | अग्नि | fire |
| कालनिसा | प्रलय की रात | night of cosmic destruction |
| सम | के समान | like |
| निसि | रात | night |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| भानू | सूर्य | the sun |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 728
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 728, 728
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।