सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु लंकेस सकल गुन तोरें। तातें तुम्ह अतिसय प्रिय मोरें।।
मूल पाठ
सुनु लंकेस सकल गुन तोरें। तातें तुम्ह अतिसय प्रिय मोरें।।
राम बचन सुनि बानर जूथा। सकल कहहिं जय कृपा बरूथा।।
स्रोत अभिलेख 5.49 · पुस्तक पृ. 758, 759
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे लङ्कापति! सुनो, तुम्हारे अंदर उपर्युक्त सब गुण हैं। इससे तुम मुझे अत्यन्त ही प्रिय हो। श्रीरामजीके वचन सुनकर सब वानरोंके समूह कहने लगे—कृपाके समूह श्रीरामजीकी जय हो!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 758 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनु लंकेस सकल गुन तोरें। तातें तुम्ह अतिसय प्रिय मोरें।।
English explanation
Listen, lord of Lanka! All these virtues are in you; therefore you are exceedingly dear to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| लंकेस | हे लंका के स्वामी विभीषण | O Vibhishana, lord of Lanka |
| सकल | सभी | all |
| गुन | गुण | virtues |
| तोरें | तुममें हैं | are in you |
| तातें | इसलिए | therefore |
| तुम्ह | तुम | you |
| अतिसय | अत्यंत | exceedingly |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोरें | मुझे | to me |
2 राम बचन सुनि बानर जूथा। सकल कहहिं जय कृपा बरूथा।।
English explanation
Hearing Rama’s words, all the monkey bands proclaim, ‘Glory to the embodiment of compassion!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | Rama’s |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बानर | वानरों के | of monkeys |
| जूथा | समूह | bands |
| सकल | सभी | all |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| जय | जय हो | glory to |
| कृपा | करुणा | compassion |
| बरूथा | राशि; पुंज | an abundance; embodiment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 758
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 758, 759
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।