सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी। बिमुख राम त्राता नहिं कोपी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे रावण! सुनो, मैं प्रतिज्ञा करके कहता हूँ कि रामविमुखकी रक्षा करनेवाला कोई भी नहीं है। हजारों शंकर, विष्णु और ब्रह्मा भी श्रीरामजीके साथ द्रोह करनेवाले तुमको नहीं बचा सकते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 735 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी। बिमुख राम त्राता नहिं कोपी।।
संकर सहस बिष्नु अज तोही। सकहिं न राखि राम कर द्रोही।।
स्रोत अभिलेख 5.23 · पुस्तक पृ. 735, 735
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी। बिमुख राम त्राता नहिं कोपी।।
English explanation
Listen, ten-headed Ravana: I declare with firm resolve that no one can protect a person turned away from Rama. The final word’s reading is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| दसकंठ | हे दस सिरों वाले रावण | O ten-headed Ravana |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| पन | प्रतिज्ञा | a solemn pledge |
| रोपी | दृढ़ करके | firmly establishing |
| बिमुख | विमुख व्यक्ति का | of one turned away |
| राम | राम से | from Rama |
| त्राता | रक्षक | protector |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| कोपी | कोई भी; राम से विमुख व्यक्ति का कोई रक्षक नहीं। | Anyone; no one can protect someone opposed to Rama. |
2 संकर सहस बिष्नु अज तोही। सकहिं न राखि राम कर द्रोही।।
English explanation
Even thousands of Shivas, Vishnus, and Brahmas cannot protect you, an enemy of Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संकर | शंकर, शिव | Shiva |
| सहस | हजारों | thousands |
| बिष्नु | भगवान विष्णु | Vishnu |
| अज | ब्रह्मा | Brahma |
| तोही | तुम्हें | you |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| न | नहीं | not |
| राखि | बचा | protect |
| राम | राम | Rama |
| कर | के | of |
| द्रोही | द्रोही, शत्रु | an enemy, one hostile |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 735
- सहायक विषय
- हनुमान्-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 735, 735
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।