सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सीता दुख प्रभु सुख अयना। भरि आए जल राजिव नयना।।
मूल पाठ
सुनि सीता दुख प्रभु सुख अयना। भरि आए जल राजिव नयना।।
बचन काँय मन मम गति जाही। सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही।।
स्रोत अभिलेख 5.32 · पुस्तक पृ. 742, 743
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजीका दु:ख सुनकर सुखके धाम प्रभुके कमलनेत्रोंमें जल भर आया [और वे बोले—] मन, वचन और शरीरसे जिसे मेरी ही गति (मेरा ही आश्रय) है, उसे क्या स्वप्रमें भी विपत्ति हो सकती है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 742 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि सीता दुख प्रभु सुख अयना। भरि आए जल राजिव नयना।।
English explanation
AI draft interpretation: Hearing of Sita’s suffering, Lord Rama, the abode of joy, had tears well up in his lotus-like eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सीता | सीता का | of Sita |
| दुख | दुख | suffering |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सुख | सुख का | of joy |
| अयना | धाम; निवास | abode |
| भरि | भरकर | filling up |
| आए | आ गए; उमड़ आए | welled up |
| जल | जल; आँसू | water; tears |
| राजिव | कमल जैसे | lotus-like |
| नयना | नेत्रों में | in the eyes |
2 बचन काँय मन मम गति जाही। सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही।।
English explanation
Can one whose refuge in speech, body, and mind is me be considered afflicted, even in a dream?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचन | वाणी से | in speech |
| काँय | शरीर से | in body |
| मन | मन से | in mind |
| मम | मैं; मेरा | I; my |
| गति | आश्रय; शरण | refuge |
| जाही | जिसके लिए | for whom |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| बूझिअ | समझना चाहिए | should be considered |
| बिपति | विपत्ति; संकट | affliction; distress |
| कि | क्या | can; whether |
| ताही | उसको | that person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 742
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 742, 743
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।