सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई। जब तव सुमिरन भजन न होई।।
मूल पाठ
कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई। जब तव सुमिरन भजन न होई।।
केतिक बात प्रभु जातुधान की। रिपुहि जीति आनिबी जानकी।।
स्रोत अभिलेख 5.32 · पुस्तक पृ. 742, 743
भावार्थ
मूल पाठ के बादहनुमान्जीने कहा—हे प्रभो! विपत्ति तो वही (तभी) है जब आपका भजन-स्मरण न हो। हे प्रभो! राक्षसोंकी बात ही कितनी है? आप शत्रुको जीतकर जानकीजीको ले आवेंगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 742 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कह हनुमंत बिपति प्रभु सोई। जब तव सुमिरन भजन न होई।।
English explanation
Hanuman said, “Lord, affliction is precisely when remembrance and worship of you cease.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| हनुमंत | हनुमान ने | Hanuman |
| बिपति | विपत्ति | affliction |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| सोई | वही | that alone |
| जब | जब | when |
| तव | आपका | of you; your |
| सुमिरन | स्मरण | remembrance |
| भजन | भजन; भक्तिपूर्ण आराधना | devotional worship |
| न | नहीं | not |
| होई | होता है | takes place |
2 केतिक बात प्रभु जातुधान की। रिपुहि जीति आनिबी जानकी।।
English explanation
Lord, how much does the demon really amount to? Defeat the enemy and bring Janaki back.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केतिक | कितनी; कितनी बड़ी | how much; how significant |
| बात | बात; महत्व | matter; significance |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| जातुधान | राक्षस; यहाँ रावण | the demon, here Ravana |
| की | की | of |
| रिपुहि | शत्रु को | the enemy |
| जीति | जीतकर | having defeated |
| आनिबी | ले आइए | bring back |
| जानकी | जानकी; जनक की पुत्री सीता को | Janaki, Sita, daughter of Janaka |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 742
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 742, 743
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।