सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि लछिमन सब निकट बोलाए। दया लागि हँसि तुरत छोडाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह सुनकर लक्ष्मणजीने सबको निकट बुलाया। उन्हें बड़ी दया लगी, इससे हँसकर उन्होंने राक्षसोंको तुरंत ही छुड़ा दिया। [और उनसे कहा—] रावणके हाथमें यह चि_ी देना [और कहना—] हे कुलघातक! लक्ष्मणके शब्दों (सँदेसे) को बाँचो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 761 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि लछिमन सब निकट बोलाए। दया लागि हँसि तुरत छोडाए।।
रावन कर दीजहु यह पाती। लछिमन बचन बाचु कुलघाती।।
स्रोत अभिलेख 5.52 · पुस्तक पृ. 761, 761
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि लछिमन सब निकट बोलाए। दया लागि हँसि तुरत छोडाए।।
English explanation
Hearing this, Lakshmana called them all near. Moved by compassion, he smiled and immediately had the messengers released.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard this |
| लछिमन | राम के भाई लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s brother |
| सब | सबको | all of them |
| निकट | पास | near |
| बोलाए | बुलाया | called |
| दया | करुणा | compassion |
| लागि | उपजी; अनुभव हुई | arose; was felt |
| हँसि | हँसकर | smiling |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| छोडाए | छुड़ा दिया | had them released |
2 रावन कर दीजहु यह पाती। लछिमन बचन बाचु कुलघाती।।
English explanation
‘Place this letter in Ravana’s hand. Read Lakshmana’s words, O Ravana, destroyer of your own clan!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावन | राक्षसराज रावण के | of Ravana, the demon king |
| कर | हाथ में | in the hand |
| दीजहु | देना | give; deliver |
| यह | यह | this |
| पाती | पत्र | letter |
| लछिमन | लक्ष्मण के | Lakshmana’s |
| बचन | वचन | words |
| बाचु | पढ़ो | read |
| कुलघाती | हे अपने कुल का नाश करने वाले | O destroyer of your own clan |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 761
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 761, 761
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।