सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना। सरनागत बच्छल भगवाना।।
मूल पाठ
सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना। सरनागत बच्छल भगवाना।।
स्रोत अभिलेख 5.43 · पुस्तक पृ. 753, 754
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके वचन सुनकर हनुमान्जी हॢषत हुए [और मन-ही-मन कहने लगे कि] भगवान् कैसे शरणागतवत्सल (शरणमें आये हुएपर पिताकी भाँति प्रेम करनेवाले) हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 754 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि प्रभु बचन हरष हनुमाना। सरनागत बच्छल भगवाना।।
English explanation
Hearing the Lord’s words, Hanuman rejoiced. The Lord is loving toward those who seek refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| बचन | वचन | words |
| हरष | हर्षित हुए | rejoiced |
| हनुमाना | हनुमान; राम के भक्त वानरवीर | Hanuman, Rama’s devoted monkey hero |
| सरनागत | शरण में आए हुए के प्रति | toward those seeking refuge |
| बच्छल | स्नेहशील | loving; affectionate |
| भगवाना | भगवान राम | Lord Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 754
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 753, 754
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।