सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना। बेगि न हरहुँ मूढ़ कर प्राना।।
मूल पाठ
सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना। बेगि न हरहुँ मूढ़ कर प्राना।।
सुनत निसाचर मारन धाए। सचिवन्ह सहित बिभीषनु आए।
स्रोत अभिलेख 5.24 · पुस्तक पृ. 736, 736
भावार्थ
मूल पाठ के बादहनुमान्जीके वचन सुनकर वह बहुत ही कुपित हो गया [और बोला—] अरे! इस मूर्खका प्राण शीघ्र ही क्यों नहीं हर लेते? सुनते ही राक्षस उन्हें मारने दौड़े। उसी समय मन्त्रियोंके साथ विभीषणजी वहाँ आ पहुँचे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 736 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि कपि बचन बहुत खिसिआना। बेगि न हरहुँ मूढ़ कर प्राना।।
English explanation
Hearing Hanuman’s words, Ravana became greatly enraged: ‘Why do you not take this fool’s life at once?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| कपि | हनुमान के | Hanuman’s |
| बचन | वचन | words |
| बहुत | बहुत | greatly |
| खिसिआना | क्रुद्ध हुआ | became enraged |
| बेगि | शीघ्र | at once |
| न | क्यों नहीं | why not |
| हरहुँ | तुम हर लेते | you take away |
| मूढ़ | मूर्ख | fool |
| कर | के | of |
| प्राना | प्राण | life |
2 सुनत निसाचर मारन धाए। सचिवन्ह सहित बिभीषनु आए।
English explanation
On hearing this, the demons rushed to kill him. Vibhishana arrived with the ministers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| निसाचर | राक्षस | demons |
| मारन | मारने के लिए | to kill |
| धाए | दौड़े | rushed |
| सचिवन्ह | मंत्रियों | ministers |
| सहित | के साथ | with |
| बिभीषनु | रावण के भाई विभीषण | Vibhishana, Ravana’s brother |
| आए | आए | arrived |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 736
- सहायक विषय
- हनुमान्-रावण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 736, 736
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।