सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु सखा निज कहउँ सुभाऊ। जान भुसुंडि संभु गिरिजाऊ।।
मूल पाठ
सुनहु सखा निज कहउँ सुभाऊ। जान भुसुंडि संभु गिरिजाऊ।।
जौं नर होइ चराचर द्रोही। आवे सभय सरन तकि मोही।।
स्रोत अभिलेख 5.48 · पुस्तक पृ. 757, 758
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[श्रीरामजीने कहा—] हे सखा! सुनो, मैं तुम्हें अपना स्वभाव कहता हूँ, जिसे काकभुशुण्डि, शिवजी और पार्वतीजी भी जानती हैं। कोई मनुष्य [सम्पूर्ण] जड-चेतन जगत्का द्रोही हो, यदि वह भी भयभीत होकर मेरी शरण तककर आ जाय,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 757 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनहु सखा निज कहउँ सुभाऊ। जान भुसुंडि संभु गिरिजाऊ।।
English explanation
Listen, friend: I tell you my own nature, which Kakabhushundi, Shiva, and Parvati know.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| सखा | हे मित्र | O friend |
| निज | अपना | my own |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| जान | जानते हैं | know |
| भुसुंडि | काकभुशुंडि, रामभक्त ऋषि | Kakabhushundi, the sage devoted to Rama |
| संभु | शिव | Shiva |
| गिरिजाऊ | पार्वती, हिमालय की पुत्री | Parvati, daughter of the Himalaya |
2 जौं नर होइ चराचर द्रोही। आवे सभय सरन तकि मोही।।
English explanation
Even if a person is hostile to all moving and unmoving creation, but comes in fear seeking my refuge,
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| नर | मनुष्य | a person |
| होइ | हो | is |
| चराचर | समस्त चल-अचल जगत का | of all moving and unmoving creation |
| द्रोही | द्रोह करने वाला | one hostile to |
| आवे | आए | comes |
| सभय | भयभीत होकर | in fear |
| सरन | शरण | refuge |
| तकि | लक्ष्य करके; खोजते हुए | seeking; turning toward |
| मोही | मुझे; मेरी ओर | me; toward me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 757
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 757, 758
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।