सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु पवनसुत रहनि हमारी। जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी।।
मूल पाठ
सुनहु पवनसुत रहनि हमारी। जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी।।
तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा। करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा।।
स्रोत अभिलेख 5.7 · पुस्तक पृ. 720, 721
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[विभीषणजीने कहा—] हे पवनपुत्र! मेरी रहनी सुनो। मैं यहाँ वैसे ही रहता हूँ, जैसे दाँतोंके बीचमें बेचारी जीभ। हे तात! मुझे अनाथ जानकर सूर्यकुलके नाथ श्रीरामचन्द्रजी क्या कभी मुझपर कृपा करेंगे?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 720 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनहु पवनसुत रहनि हमारी। जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी।।
English explanation
AI draft: Vibhishana says, “Son of the Wind, hear how I live: like the poor tongue among the teeth.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| पवनसुत | हे पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the Wind |
| रहनि | रहने की दशा | condition of living |
| हमारी | मेरी | my |
| जिमि | जैसे | as |
| दसनन्हि | दाँतों | the teeth |
| महुँ | के बीच | among |
| जीभ | जीभ | the tongue |
| बिचारी | बेचारी, असहाय | poor, helpless |
2 तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा। करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा।।
English explanation
Dear one, will Rama, lord of the solar dynasty, ever show me mercy, knowing me to be without a protector?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय | dear one |
| कबहुँ | कभी | ever |
| मोहि | मुझे | me |
| जानि | जानकर | knowing to be |
| अनाथा | अनाथ, रक्षकहीन | without a protector |
| करिहहिं | करेंगे | will bestow |
| कृपा | कृपा | mercy |
| भानुकुल | सूर्यवंश के | of the solar dynasty |
| नाथा | स्वामी राम | the lord, Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 720
- सहायक विषय
- हनुमान्-विभीषण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 720, 721
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।