सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तामस तनु कछु साधन नाहीं। प्रीति न पद सरोज मन माहीं।।
मूल पाठ
तामस तनु कछु साधन नाहीं। प्रीति न पद सरोज मन माहीं।।
अब मोहि भा भरोस हनुमंता। बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता।।
स्रोत अभिलेख 5.7 · पुस्तक पृ. 720, 721
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरा तामसी (राक्षस) शरीर होनेसे साधन तो कुछ बनता नहीं और न मनमें श्रीरामचन्द्रजीके चरणकमलोंमें प्रेम ही है। परन्तु हे हनुमान्! अब मुझे विश्वास हो गया कि श्रीरामजीकी मुझपर कृपा है; क्योंकि हरिकी कृपाके बिना संत नहीं मिलते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 720 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तामस तनु कछु साधन नाहीं। प्रीति न पद सरोज मन माहीं।।
English explanation
My body is tamasic; I have no spiritual means, nor does my heart hold love for the Lord’s lotus-like feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तामस | तमोगुणप्रधान | dominated by tamas |
| तनु | शरीर | body |
| कछु | कोई भी | any |
| साधन | आध्यात्मिक साधन | spiritual means or practice |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| पद | प्रभु के चरण | the Lord’s feet |
| सरोज | कमल | lotuses |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | within |
2 अब मोहि भा भरोस हनुमंता। बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता।।
English explanation
Hanuman, now I have gained confidence, for one does not meet saints without Hari’s grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| मोहि | मुझे | to me |
| भा | हो गया | has arisen |
| भरोस | भरोसा | confidence |
| हनुमंता | हे हनुमान | O Hanuman |
| बिनु | बिना | without |
| हरिकृपा | हरि की कृपा | Hari’s grace |
| मिलहिं | मिलते हैं | are met |
| नहिं | नहीं | not |
| संता | संत | saints |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 720
- सहायक विषय
- हनुमान्-विभीषण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 720, 721
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।