सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौ रघुबीर अनुग्रह कीन्हा। तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा।।
मूल पाठ
जौ रघुबीर अनुग्रह कीन्हा। तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा।।
सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती। करहिं सदा सेवक पर प्रीती।।
स्रोत अभिलेख 5.7 · पुस्तक पृ. 720, 721
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब श्रीरघुवीरने कृपा की है, तभी तो आपने मुझे हठ करके (अपनी ओरसे) दर्शन दिये हैं। [हनुमान्जीने कहा—] हे विभीषणजी! सुनिये, प्रभुकी यही रीति है कि वे सेवकपर सदा ही प्रेम किया करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 721 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौ रघुबीर अनुग्रह कीन्हा। तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा।।
English explanation
If Rama has favored me, it is for that reason that you have taken the initiative to grant me this meeting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौ | यदि | if |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| अनुग्रह | अनुग्रह | favor |
| कीन्हा | किया | bestowed |
| तौ | तो, तभी | then |
| तुम्ह | आपने | you |
| मोहि | मुझे | to me |
| दरसु | दर्शन | a meeting with you |
| हठि | आग्रहपूर्वक, अपनी पहल से | insistently, on your own initiative |
| दीन्हा | दिए | granted |
2 सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती। करहिं सदा सेवक पर प्रीती।।
English explanation
Hanuman says, “Vibhishana, hear the Lord’s way: he always loves his servant.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| बिभीषन | हे विभीषण | O Vibhishana |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कै | की | of |
| रीती | रीति, स्वभाव | way, disposition |
| करहिं | करते हैं | show |
| सदा | सदा | always |
| सेवक | सेवक | his servant |
| पर | के प्रति | toward |
| प्रीती | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 721
- सहायक विषय
- हनुमान्-विभीषण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 720, 721
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।