सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत सभय मन मुख मुसुकाई। कहत दसानन सबहि सुनाई।।
मूल पाठ
सुनत सभय मन मुख मुसुकाई। कहत दसानन सबहि सुनाई।।
भूमि परा कर गहत अकासा। लघु तापस कर बाग बिलासा।।
स्रोत अभिलेख 5.57 · पुस्तक पृ. 765, 766
भावार्थ
मूल पाठ के बादपत्रिका सुनते ही रावण मनमें भयभीत हो गया, परन्तु मुखसे (ऊपरसे) मुसकराता हुआ वह सबको सुनाकर कहने लगा—जैसे कोई पृथ्वीपर पड़ा हुआ हाथसे आकाशको पकडऩेकी चेष्टा करता हो, वैसे ही यह छोटा तपस्वी (लक्ष्मण) वाग्विलास करता है (डींग हाँकता है)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 765 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनत सभय मन मुख मुसुकाई। कहत दसानन सबहि सुनाई।।
English explanation
This is an AI draft. On hearing this, Ravana felt afraid inwardly but smiled outwardly and spoke for everyone to hear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनकर | on hearing |
| सभय | भय सहित; भयभीत | afraid |
| मन | मन में | inwardly |
| मुख | मुख से | with his face |
| मुसुकाई | मुसकराया | smiled |
| कहत | कहता है | says |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | Ravana, the ten-headed king |
| सबहि | सबको | to everyone |
| सुनाई | सुनाकर | making it heard |
2 भूमि परा कर गहत अकासा। लघु तापस कर बाग बिलासा।।
English explanation
Lying on the ground, he tries to grasp the sky with his hand! This insignificant ascetic's talk is mere verbal extravagance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूमि | धरती पर | on the ground |
| परा | पड़ा हुआ | lying |
| कर | हाथ से | with his hand |
| गहत | पकड़ता है | grasps |
| अकासा | आकाश | the sky |
| लघु | छोटा; तुच्छ | insignificant |
| तापस | तपस्वी राम | the ascetic Rama |
| कर | का | of |
| बाग | वाणी; बातें | speech; talk |
| बिलासा | विलास; दिखावटी विस्तार | extravagance; display |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.57
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 765
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 765, 766
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।