सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत कृपानिधि मन अति भाए। पुनि हनुमान हरषि हियँ लाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[वे चरित्र] सुननेपर कृपानिधि श्रीरामचन्द्रजीके मनको बहुत ही अच्छे लगे। उन्होंने हॢषत होकर हनुमान्जीको फिर हृदयसे लगा लिया और कहा—हे तात! कहो, सीता किस प्रकार रहती और अपने प्राणोंकी रक्षा करती हैं?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 741 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनत कृपानिधि मन अति भाए। पुनि हनुमान हरषि हियँ लाए।।
कहहु तात केहि भाँति जानकी। रहति करति रच्छा स्वप्रान की।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 741, 741
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनत कृपानिधि मन अति भाए। पुनि हनुमान हरषि हियँ लाए।।
English explanation
On hearing them, Rama, the treasury of compassion, found those deeds deeply pleasing; then he joyfully embraced Hanuman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही, सुनकर | on hearing |
| कृपानिधि | कृपा के भंडार राम | Rama, treasury of compassion |
| मन | मन को | to the heart |
| अति | बहुत | greatly |
| भाए | अच्छे लगे | were pleasing |
| पुनि | फिर | then |
| हनुमान | हनुमान को | Hanuman |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| हियँ | हृदय से, छाती से | to his heart, to his chest |
| लाए | लगा लिया | drew close in an embrace |
2 कहहु तात केहि भाँति जानकी। रहति करति रच्छा स्वप्रान की।।
English explanation
Rama asked, “Tell me, dear one: how does Sita live and preserve her life?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताओ | tell me |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| केहि | किस | what |
| भाँति | प्रकार | manner |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| रहति | रहती हैं | lives |
| करति | करती हैं | does |
| रच्छा | रक्षा | protection |
| स्वप्रान | अपने प्राणों | her own life |
| की | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 741
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 741
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।