सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाथ पवनसुत कीन्हि जो करनी। सहसहुँ मुख न जाइ सो बरनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे नाथ! पवनपुत्र हनुमान्ने जो करनी की, उसका हजार मुखोंसे भी वर्णन नहीं किया जा सकता। तब जाम्बवान्ने हनुमान्जीके सुन्दर चरित्र (कार्य) श्रीरघुनाथजीको सुनाये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 741 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नाथ पवनसुत कीन्हि जो करनी। सहसहुँ मुख न जाइ सो बरनी।।
पवनतनय के चरित सुहाए। जामवंत रघुपतिहि सुनाए।।
स्रोत अभिलेख 5.3 · पुस्तक पृ. 741, 741
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नाथ पवनसुत कीन्हि जो करनी। सहसहुँ मुख न जाइ सो बरनी।।
English explanation
Master, what Hanuman, the son of the wind god, has accomplished cannot be described even with a thousand mouths.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O Master |
| पवनसुत | पवनदेव के पुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| कीन्हि | किया | performed |
| जो | जो | which |
| करनी | कार्य, पराक्रम | deed, feat |
| सहसहुँ | हजारों से भी | even with a thousand |
| मुख | मुख | mouths |
| न | नहीं | not |
| जाइ | किया जा सकता | can be |
| सो | वह | that |
| बरनी | वर्णित | described |
2 पवनतनय के चरित सुहाए। जामवंत रघुपतिहि सुनाए।।
English explanation
Jambavan recounted Hanuman’s admirable deeds to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पवनतनय | पवनदेव के पुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind god |
| के | के | of |
| चरित | चरित, कार्य | deeds |
| सुहाए | सुंदर, मनभावन | admirable, pleasing |
| जामवंत | जामवंत, रीछों के वरिष्ठ नायक | Jambavan, the elder bear leader |
| रघुपतिहि | रघुकुल के स्वामी राम को | to Rama, lord of Raghu’s lineage |
| सुनाए | सुनाए | recounted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 741
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 741, 741
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।