सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
साधु अवग्या कर फलु ऐसा। जरइ नगर अनाथ कर जैसा।।
मूल पाठ
साधु अवग्या कर फलु ऐसा। जरइ नगर अनाथ कर जैसा।।
जारा नगरु निमिष एक माहीं। एक बिभीषन कर गृह नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 5.26 · पुस्तक पृ. 737, 738
भावार्थ
मूल पाठ के बादसाधुके अपमानका यह फल है कि नगर अनाथके नगरकी तरह जल रहा है। हनुमान्जीने एक ही क्षणमें सारा नगर जला डाला। एक विभीषणका घर नहीं जलाया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 738 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 साधु अवग्या कर फलु ऐसा। जरइ नगर अनाथ कर जैसा।।
English explanation
Such is the consequence of dishonoring a virtuous person. The city burns as though it belonged to someone with no protector.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साधु | सज्जन की | of a virtuous person |
| अवग्या | अवज्ञा, अनादर | disrespect |
| कर | का | of |
| फलु | फल, परिणाम | consequence |
| ऐसा | ऐसा | such |
| जरइ | जल रहा है | is burning |
| नगर | नगर | city |
| अनाथ | रक्षकहीन व्यक्ति | someone without a protector |
| कर | का | belonging to |
| जैसा | जैसा | as though |
2 जारा नगरु निमिष एक माहीं। एक बिभीषन कर गृह नाहीं।।
English explanation
Hanuman burned the city in a single instant; only Vibhishana’s house was not burned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जारा | जला दिया | burned |
| नगरु | नगर | the city |
| निमिष | पलक झपकने जितना समय | an instant |
| एक | एक | one |
| माहीं | में | within |
| एक | केवल | only |
| बिभीषन | विभीषण, रावण के भाई | Vibhishana, Ravana’s brother |
| कर | का | of |
| गृह | घर | house |
| नाहीं | नहीं जलाया | was not burned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 738
- सहायक विषय
- लङ्का-दहन
- मुद्रित पृष्ठ
- 737, 738
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।