सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ता कर दूत अनल जेहिं सिरिजा। जरा न सो तेहि कारन गिरिजा।।
मूल पाठ
ता कर दूत अनल जेहिं सिरिजा। जरा न सो तेहि कारन गिरिजा।।
उलटि पलटि लंका सब जारी। कूदि परा पुनि सिंधु मझारी।।
स्रोत अभिलेख 5.26 · पुस्तक पृ. 737, 738
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[शिवजी कहते हैं—] हे पार्वती! जिन्होंने अग्रिको बनाया, हनुमान्जी उन्हींके दूत हैं। इसी कारण वे अग्रिसे नहीं जले। हनुमान्जीने उलट-पलटकर (एक ओरसे दूसरी ओरतक) सारी लङ्का जला दी। फिर वे समुद्रमें कूद पड़े॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 738 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ता कर दूत अनल जेहिं सिरिजा। जरा न सो तेहि कारन गिरिजा।।
English explanation
O Parvati, Hanuman is the messenger of the one who created fire; for that reason, he himself did not burn.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ता | उसका | that one’s |
| कर | का | of |
| दूत | दूत | messenger |
| अनल | अग्नि | fire |
| जेहिं | जिसने | who |
| सिरिजा | रची | created |
| जरा | जले | burned |
| न | नहीं | not |
| सो | वे हनुमान | he, Hanuman |
| तेहि | उसी | that very |
| कारन | कारण से | for the reason |
| गिरिजा | हे पार्वती, पर्वतराज की पुत्री | O Parvati, daughter of the mountain king |
2 उलटि पलटि लंका सब जारी। कूदि परा पुनि सिंधु मझारी।।
English explanation
Moving back and forth, Hanuman burned all of Lanka; then he jumped into the sea.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उलटि | मुड़कर | turning back |
| पलटि | फिर घूमकर | turning about |
| लंका | लंका नगरी | the city of Lanka |
| सब | सारी | all |
| जारी | जला दी | burned |
| कूदि | कूदकर | jumping |
| परा | जा पड़े | plunged |
| पुनि | फिर | then |
| सिंधु | समुद्र | the sea |
| मझारी | के भीतर | into |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 738
- सहायक विषय
- लङ्का-दहन
- मुद्रित पृष्ठ
- 737, 738
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