सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहज बानि सेवक सुख दायक। कबहुँक सुरति करत रघुनायक।।
मूल पाठ
सहज बानि सेवक सुख दायक। कबहुँक सुरति करत रघुनायक।।
कबहुँ नयन मम सीतल ताता। होइहहि निरखि स्याम मृदु गाता।।
स्रोत अभिलेख 5.14 · पुस्तक पृ. 727, 728
भावार्थ
मूल पाठ के बादसेवकको सुख देना उनकी स्वाभाविक बान है। वे श्रीरघुनाथजी क्या कभी मेरी भी याद करते हैं? हे तात! क्या कभी उनके कोमल साँवले अङ्गोंको देखकर मेरे नेत्र शीतल होंगे?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 727 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सहज बानि सेवक सुख दायक। कबहुँक सुरति करत रघुनायक।।
English explanation
His natural disposition is to bring happiness to his servants. Does Rama ever remember me?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| बानि | स्वभाव | disposition |
| सेवक | सेवकों को | to servants |
| सुख | सुख | happiness |
| दायक | देने वाला | giving |
| कबहुँक | कभी | ever |
| सुरति | स्मरण | remembrance |
| करत | करते हैं | undertake |
| रघुनायक | रघुवंश के नायक राम | Rama, leader of the Raghu lineage |
2 कबहुँ नयन मम सीतल ताता। होइहहि निरखि स्याम मृदु गाता।।
English explanation
Dear son, will my eyes ever find soothing relief by beholding his dark, tender form?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहुँ | कभी | ever |
| नयन | नेत्र | eyes |
| मम | मेरे | my |
| सीतल | शीतल; तृप्त | soothed; refreshed |
| ताता | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| होइहहि | होंगे | will become |
| निरखि | देखकर | on beholding |
| स्याम | साँवला | dark-hued |
| मृदु | कोमल | tender |
| गाता | शरीर | body; form |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 727
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 727, 728
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।