सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बचनु न आव नयन भरे बारी। अहह नाथ हौं निपट बिसारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[मुँहसे ] वचन नहीं निकलता, नेत्रोंमें [विरहके आँसुओंका] जल भर आया। [बड़े दु:खसे वे बोलीं—] हा नाथ! आपने मुझे बिलकुल ही भुला दिया! सीताजीको विरहसे परम व्याकुल देखकर हनुमान्जी कोमल और विनीत वचन बोले—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 727 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बचनु न आव नयन भरे बारी। अहह नाथ हौं निपट बिसारी।।
देखि परम बिरहाकुल सीता। बोला कपि मृदु बचन बिनीता।।
स्रोत अभिलेख 5.14 · पुस्तक पृ. 727, 728
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बचनु न आव नयन भरे बारी। अहह नाथ हौं निपट बिसारी।।
English explanation
Sita cannot speak; her eyes fill with tears. She laments, ‘Alas, my lord! You have utterly forgotten me.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बचनु | बोल; शब्द | speech; words |
| न | नहीं | not |
| आव | निकलते | come forth |
| नयन | आँखें | eyes |
| भरे | भर गए | filled |
| बारी | आँसुओं से | with tears |
| अहह | हाय | alas |
| नाथ | हे स्वामी राम | O my lord Rama |
| हौं | मैं; मुझे | I; me |
| निपट | बिल्कुल | utterly |
| बिसारी | भुला दी गई | forgotten |
2 देखि परम बिरहाकुल सीता। बोला कपि मृदु बचन बिनीता।।
English explanation
Seeing Sita deeply distressed by separation, Hanuman spoke gentle, humble words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| परम | अत्यंत | extremely |
| बिरहाकुल | वियोग से व्याकुल | distraught with separation |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| बोला | बोले | spoke |
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey messenger |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| बिनीता | विनम्र | humble |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 727
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 727, 728
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।