सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु कुसल प्रभु अनुज समेता। तव दुख दुखी सुकृपा निकेता।।
मूल पाठ
मातु कुसल प्रभु अनुज समेता। तव दुख दुखी सुकृपा निकेता।।
जनि जननी मानहु जियँ ऊना। तुम्ह ते प्रेमु राम कें दूना।।
स्रोत अभिलेख 5.14 · पुस्तक पृ. 727, 728
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे माता! सुन्दर कृपाके धाम प्रभु भाई लक्ष्मणजीके सहित [शरीरसे ] कुशल हैं, परन्तु आपके दु:खसे दुखी हैं। हे माता! मनमें ग्लानि न मानिये (मन छोटा करके दु:ख न कीजिये)। श्रीरामचन्द्रजीके हृदयमें आपसे दूना प्रेम है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 727 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मातु कुसल प्रभु अनुज समेता। तव दुख दुखी सुकृपा निकेता।।
English explanation
Mother, Lord Rama is well, together with his younger brother. An abode of gracious compassion, he grieves at your sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | हे माता | O mother |
| कुसल | कुशल हैं | is well |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| समेता | सहित | together with |
| तव | आपके | your |
| दुख | दुख से | at sorrow |
| दुखी | दुखी | grieved |
| सुकृपा | उत्तम कृपा का | of gracious compassion |
| निकेता | धाम | abode |
2 जनि जननी मानहु जियँ ऊना। तुम्ह ते प्रेमु राम कें दूना।।
English explanation
Mother, do not think in your heart that his love is deficient. Rama’s love is twice yours.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनि | मत | do not |
| जननी | हे माता | O mother |
| मानहु | समझिए | consider |
| जियँ | मन में | in your heart |
| ऊना | कम; न्यून | deficient; less |
| तुम्ह | आपसे | you |
| ते | की अपेक्षा | than |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| राम | राम | Rama |
| कें | का | belonging to |
| दूना | दुगुना | twice as great |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 727
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 727, 728
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।