सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सरन गएँ प्रभु ताहु न त्यागा। बिस्व द्रोह कृत अघ जेहि लागा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिसे सम्पूर्ण जगत्से द्रोह करनेका पाप लगा है, शरण जानेपर प्रभु उसका भी त्याग नहीं करते। जिनका नाम तीनों तापोंका नाश करनेवाला है, वे ही प्रभु (भगवान्) मनुष्यरूपमें प्रकट हुए हैं। हे रावण! हृदयमें यह समझ लीजिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 750 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सरन गएँ प्रभु ताहु न त्यागा। बिस्व द्रोह कृत अघ जेहि लागा।।
जासु नाम त्रय ताप नसावन। सोइ प्रभु प्रगट समुझु जियँ रावन।।
स्रोत अभिलेख 5.39 · पुस्तक पृ. 749, 750
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सरन गएँ प्रभु ताहु न त्यागा। बिस्व द्रोह कृत अघ जेहि लागा।।
English explanation
The Lord does not abandon even one burdened with the sin of hostility toward the whole world, if that person seeks his refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरन | शरण में | into refuge |
| गएँ | जाने पर | upon seeking |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| ताहु | उसे भी | even that person |
| न | नहीं | not |
| त्यागा | त्यागते | abandons |
| बिस्व | समस्त संसार के प्रति | toward the whole world |
| द्रोह | द्रोह | hostility; harm |
| कृत | करने से उत्पन्न | arising from committing |
| अघ | पाप | sin |
| जेहि | जिसे; जिस पर | whom; upon whom |
| लागा | लगा हो | has fallen; burdens |
2 जासु नाम त्रय ताप नसावन। सोइ प्रभु प्रगट समुझु जियँ रावन।।
English explanation
The very Lord whose name removes the three kinds of suffering has manifested; understand this in your heart, Ravana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनका | whose |
| नाम | नाम | name |
| त्रय | तीन प्रकार के | three kinds of |
| ताप | दुःख; संताप | suffering; afflictions |
| नसावन | नष्ट करने वाला | removing |
| सोइ | वही | that very |
| प्रभु | प्रभु | Lord |
| प्रगट | प्रकट हुए हैं | has manifested |
| समुझु | समझो | understand |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| रावन | हे रावण | Ravana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 750
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 749, 750
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।