सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ताहि बयरु तजि नाइअ माथा। प्रनतारति भंजन रघुनाथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवैर त्यागकर उन्हें मस्तक नवाइये। वे श्रीरघुनाथजी शरणागतका दु:ख नाश करनेवाले हैं। हे नाथ! उन प्रभु (सर्वेश्वर) को जानकीजी दे दीजिये और बिना ही कारण स्नेह करनेवाले श्रीरामजीको भजिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 750 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ताहि बयरु तजि नाइअ माथा। प्रनतारति भंजन रघुनाथा।।
देहु नाथ प्रभु कहुँ बैदेही। भजहु राम बिनु हेतु सनेही।।
स्रोत अभिलेख 5.39 · पुस्तक पृ. 749, 750
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ताहि बयरु तजि नाइअ माथा। प्रनतारति भंजन रघुनाथा।।
English explanation
Abandon hostility toward him and bow your head before him; Rama, lord of Raghu’s lineage, removes the suffering of those who seek refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताहि | उनसे; उनके आगे | toward him; before him |
| बयरु | बैर | hostility |
| तजि | छोड़कर | having abandoned |
| नाइअ | झुकाइए | bow |
| माथा | सिर | head |
| प्रनतारति | शरणागतों की पीड़ा | suffering of those seeking refuge |
| भंजन | दूर करने वाले | remover |
| रघुनाथा | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 देहु नाथ प्रभु कहुँ बैदेही। भजहु राम बिनु हेतु सनेही।।
English explanation
My lord, return Sita to Lord Rama, and worship Rama, who loves without any self-serving motive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देहु | दे दीजिए | give back |
| नाथ | हे स्वामी | my lord |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कहुँ | को | to |
| बैदेही | विदेह की पुत्री सीता | Sita, daughter of the king of Videha |
| भजहु | भजन कीजिए | worship |
| राम | श्रीराम का | Rama |
| बिनु | बिना | without |
| हेतु | स्वार्थपूर्ण कारण | self-serving motive |
| सनेही | प्रेम करने वाले | one who loves |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 750
- सहायक विषय
- रावणको विभीषणका समझाना और विभीषणका अपमान
- मुद्रित पृष्ठ
- 749, 750
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।