सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सभय सिंधु गहि पद प्रभु केरे। छमहु नाथ सब अवगुन मेरे।।
मूल पाठ
सभय सिंधु गहि पद प्रभु केरे। छमहु नाथ सब अवगुन मेरे।।
गगन समीर अनल जल धरनी। इन्ह कइ नाथ सहज जड़ करनी।।
स्रोत अभिलेख 5.59 · पुस्तक पृ. 767, 768
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमुद्रने भयभीत होकर प्रभुके चरण पकड़कर कहा—हे नाथ! मेरे सब अवगुण (दोष) क्षमा कीजिये। हे नाथ! आकाश, वायु, अग्रि, जल और पृथ्वी—इन सबकी करनी स्वभावसे ही जड है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 767 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सभय सिंधु गहि पद प्रभु केरे। छमहु नाथ सब अवगुन मेरे।।
English explanation
The frightened ocean grasped Lord Rama’s feet and said, “Lord, forgive all my faults.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सभय | भयभीत | frightened |
| सिंधु | समुद्र | the ocean, personified |
| गहि | पकड़कर | having grasped |
| पद | चरण | feet |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| केरे | के | of |
| छमहु | क्षमा कीजिए | please forgive |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| सब | सभी | all |
| अवगुन | दोष | faults |
| मेरे | मेरे | my |
2 गगन समीर अनल जल धरनी। इन्ह कइ नाथ सहज जड़ करनी।।
English explanation
Lord, sky, air, fire, water, and earth are inherently insentient in their functioning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गगन | आकाश | sky |
| समीर | वायु | air |
| अनल | अग्नि | fire |
| जल | जल | water |
| धरनी | पृथ्वी | earth |
| इन्ह | इन तत्वों | these elements |
| कइ | की | of |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| सहज | स्वभावतः | inherently |
| जड़ | चेतनारहित | insentient |
| करनी | व्यवहार या कार्यप्रणाली | conduct or functioning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 767
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती
- मुद्रित पृष्ठ
- 767, 768
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।