सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तव प्रेरित मायाँ उपजाए। सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआपकी प्रेरणासे मायाने इन्हें सृष्टिके लिये उत्पन्न किया है, सब ग्रन्थोंने यही गाया है। जिसके लिये स्वामीकी जैसी आज्ञा है, वह उसी प्रकारसे रहनेमें सुख पाता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 767 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तव प्रेरित मायाँ उपजाए। सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए।।
प्रभु आयसु जेहि कहँ जस अहई। सो तेहि भाँति रहे सुख लहई।।
स्रोत अभिलेख 5.59 · पुस्तक पृ. 767, 768
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तव प्रेरित मायाँ उपजाए। सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए।।
English explanation
Prompted by you, Maya brought these into being; all the scriptures describe them as causes of creation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपके द्वारा | by you |
| प्रेरित | प्रेरित होकर | being prompted |
| मायाँ | माया ने | Maya, the power of manifestation |
| उपजाए | इन तत्वों को उत्पन्न किया | brought these elements into being |
| सृष्टि | सृष्टि के | of creation |
| हेतु | कारण | causes |
| सब | सभी | all |
| ग्रंथनि | ग्रंथों ने | the scriptures |
| गाए | वर्णित किया है | have described |
2 प्रभु आयसु जेहि कहँ जस अहई। सो तेहि भाँति रहे सुख लहई।।
English explanation
Lord, each being finds ease by remaining in the manner you have ordained for it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| आयसु | आज्ञा | command |
| जेहि | जिसके | whichever being |
| कहँ | लिए | for |
| जस | जैसी | of whatever kind |
| अहई | है | is |
| सो | वह | that being |
| तेहि | उसी | that same |
| भाँति | प्रकार | manner |
| रहे | रहकर | by remaining |
| सुख | सुख | ease |
| लहई | पाता है | finds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.59
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 767
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती
- मुद्रित पृष्ठ
- 767, 768
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।