सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्रवनामृत जेहिं कथा सुहाई। कहि सो प्रगट होति किन भाई।।
मूल पाठ
श्रवनामृत जेहिं कथा सुहाई। कहि सो प्रगट होति किन भाई।।
तब हनुमंत निकट चलि गयऊ। फिरि बैंठीं मन बिसमय भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 5.13 · पुस्तक पृ. 726, 727
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[सीताजी बोलीं—] जिसने कानोंके लिये अमृतरूप यह सुन्दर कथा कही, वह हे भाई! प्रकट क्यों नहीं होता? तब हनुमान्जी पास चले गये। उन्हें देखकर सीताजी फिरकर (मुख फेरकर) बैठ गयीं; उनके मनमें आश्चर्य हुआ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 726 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 श्रवनामृत जेहिं कथा सुहाई। कहि सो प्रगट होति किन भाई।।
English explanation
Sita said: Brother, why does the one who told this delightful story, nectar to the ears, not show himself?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रवनामृत | कानों के लिए अमृत | nectar to the ears |
| जेहिं | जिसने | who; the one who |
| कथा | कथा | story |
| सुहाई | सुंदर; मनभावन | delightful |
| कहि | कही | told |
| सो | वह कथावाचक | that speaker |
| प्रगट | प्रत्यक्ष; सामने | visible; in person |
| होति | होता है | becomes; appears |
| किन | क्यों नहीं | why not |
| भाई | हे भाई | O brother |
2 तब हनुमंत निकट चलि गयऊ। फिरि बैंठीं मन बिसमय भयऊ।।
English explanation
Then Hanuman went nearer. Sita turned and sat, and wonder arose in her mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| हनुमंत | हनुमान | Hanuman |
| निकट | पास | near |
| चलि | चलकर | walking |
| गयऊ | गए | went |
| फिरि | मुड़कर; फिर | turning; then again |
| बैंठीं | बैठ गईं | sat down |
| मन | मन में | in her mind |
| बिसमय | आश्चर्य | wonder |
| भयऊ | हुआ | arose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 726
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 726, 727
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