सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामचंद्र गुन बरनैं लागा। सुनतहिं सीता कर दुख भागा।।
मूल पाठ
रामचंद्र गुन बरनैं लागा। सुनतहिं सीता कर दुख भागा।।
लागीं सुनैं श्रवन मन लाई। आदिहु तें सब कथा सुनाई।।
स्रोत अभिलेख 5.13 · पुस्तक पृ. 726, 727
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे श्रीरामचन्द्रजीके गुणोंका वर्णन करने लगे, [जिनके] सुनते ही सीताजीका दु:ख भाग गया। वे कान और मन लगाकर उन्हें सुनने लगीं। हनुमान्जीने आदिसे लेकर सारी कथा कह सुनायी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 726 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रामचंद्र गुन बरनैं लागा। सुनतहिं सीता कर दुख भागा।।
English explanation
Hanuman began describing Rama’s virtues; upon hearing them, Sita’s sorrow fled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामचंद्र | श्रीराम के | of Rama |
| गुन | गुण | virtues |
| बरनैं | वर्णन करने | to describe |
| लागा | लग गए | began |
| सुनतहिं | सुनते ही | as soon as she heard |
| सीता | सीता | Sita |
| कर | का | of; possessive marker |
| दुख | दुःख | sorrow |
| भागा | दूर हो गया | fled; disappeared |
2 लागीं सुनैं श्रवन मन लाई। आदिहु तें सब कथा सुनाई।।
English explanation
Sita began listening with attentive ears and mind; Hanuman related the whole story from the very beginning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागीं | लग गईं; सीता आरंभ करने लगीं | began; referring to Sita |
| सुनैं | सुनने | to listen |
| श्रवन | कान | ears |
| मन | मन | mind |
| लाई | लगाकर | having focused |
| आदिहु | आरंभ ही | the very beginning |
| तें | से | from |
| सब | पूरी | entire |
| कथा | कथा | story |
| सुनाई | सुनाई; हनुमान ने बताई | related; Hanuman narrated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 726
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 726, 727
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