सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जीति को सकइ अजय रघुराई। माया तें असि रचि नहिं जाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[वे सोचने लगीं—] श्रीरघुनाथजी तो सर्वथा अजेय हैं, उन्हें कौन जीत सकता है? और मायासे ऐसी (मायाके उपादानसे सर्वथा रहित दिव्य, चिन्मय) अँगूठी बनायी नहीं जा सकती। सीताजी मनमें अनेक प्रकारके विचार कर रही थीं। इसी समय हनुमान्जी मधुर वचन बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 726 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जीति को सकइ अजय रघुराई। माया तें असि रचि नहिं जाई।।
सीता मन बिचार कर नाना। मधुर बचन बोलेउ हनुमाना।।
स्रोत अभिलेख 5.13 · पुस्तक पृ. 726, 727
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जीति को सकइ अजय रघुराई। माया तें असि रचि नहिं जाई।।
English explanation
Who could defeat the invincible Lord of Raghu’s line? Such a ring cannot be fashioned through illusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीति | जीतना; पराजित करना | defeat |
| को | कौन | who |
| सकइ | सकता है | can |
| अजय | जिसे जीता न जा सके | invincible |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम को | Rama, lord of Raghu’s line |
| माया | माया; छलपूर्ण भ्रम | illusion; deceptive magic |
| तें | से; के द्वारा | by; through |
| असि | ऐसी अँगूठी | such a ring |
| रचि | बनाई | fashioned |
| नहिं | नहीं | not |
| जाई | जा सकती | can be |
2 सीता मन बिचार कर नाना। मधुर बचन बोलेउ हनुमाना।।
English explanation
Sita was considering many things in her mind; Hanuman spoke sweet words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | राम की पत्नी सीता | Sita, Rama’s wife |
| मन | मन में | in her mind |
| बिचार | विचार | thoughts |
| कर | करती हैं | considers |
| नाना | अनेक प्रकार के | various |
| मधुर | मीठे; सुखद | sweet; pleasing |
| बचन | वचन | words |
| बोलेउ | बोले | spoke |
| हनुमाना | रामभक्त हनुमान | Hanuman, Rama’s devotee |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 726
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 726, 727
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।