सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम दूत मैं मातु जानकी। सत्य सपथ करुनानिधान की।।
मूल पाठ
राम दूत मैं मातु जानकी। सत्य सपथ करुनानिधान की।।
यह मुद्रिका मातु मैं आनी। दीन्हि राम तुम्ह कहँ सहिदानी।।
स्रोत अभिलेख 5.13 · पुस्तक पृ. 726, 727
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[हनुमान्जीने कहा—] हे माता जानकी! मैं श्रीरामजीका दूत हूँ। करुणानिधानकी सच्ची शपथ करता हूँ। हे माता! यह अँगूठी मैं ही लाया हूँ। श्रीरामजीने मुझे आपके लिये यह सहिदानी (निशानी या पहिचान) दी है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 726 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम दूत मैं मातु जानकी। सत्य सपथ करुनानिधान की।।
English explanation
Mother Janaki, I am Rama’s messenger; I swear truly by Rama, the treasury of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| दूत | संदेशवाहक | messenger |
| मैं | मैं | I |
| मातु | हे माता | O mother |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| सत्य | सच्ची | true; sincere |
| सपथ | शपथ | oath |
| करुनानिधान | करुणा के भंडार राम | Rama, treasury of compassion |
| की | की; शपथ का संबंध | by; linking the oath to Rama |
2 यह मुद्रिका मातु मैं आनी। दीन्हि राम तुम्ह कहँ सहिदानी।।
English explanation
Mother, I brought this ring; Rama gave it for you as a token of identification.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| मुद्रिका | अँगूठी | ring |
| मातु | हे माता | O mother |
| मैं | मैंने | I |
| आनी | लाई है | have brought |
| दीन्हि | दी | gave |
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| तुम्ह | आप | you |
| कहँ | को; के लिए | to; for |
| सहिदानी | पहचान का प्रमाण; निशानी | identifying token; proof |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 726
- सहायक विषय
- श्रीसीता-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 726, 727
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।