सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम तेज बल बुधि बिपुलाई। सेष सहस सत सकहिं न गाई।।
मूल पाठ
राम तेज बल बुधि बिपुलाई। सेष सहस सत सकहिं न गाई।।
सक सर एक सोषि सत सागर। तब भ्रातहि पूँछेउ नय नागर।।
स्रोत अभिलेख 5.56 · पुस्तक पृ. 764, 765
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीके तेज (सामथ्र्य), बल और बुद्धिकी अधिकताको लाखों शेष भी नहीं गा सकते। वे एक ही बाणसे सैकड़ों समुद्रोंको सोख सकते हैं, परन्तु नीतिनिपुण श्रीरामजीने [नीतिकी रक्षाके लिये] आपके भाईसे उपाय पूछा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 764 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम तेज बल बुधि बिपुलाई। सेष सहस सत सकहिं न गाई।।
English explanation
AI draft: Even a hundred thousand Sheshas cannot fully sing of the vastness of Rama’s radiance, strength, and wisdom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| तेज | तेज, प्रताप | radiance and might |
| बल | शक्ति | strength |
| बुधि | बुद्धि | wisdom |
| बिपुलाई | विशालता | vastness |
| सेष | शेषनाग | Shesha, the serpent deity |
| सहस | हजार | thousand |
| सत | सौ | hundred |
| सकहिं | कर सकते हैं | can |
| न | नहीं | not |
| गाई | गाकर वर्णन करना | sing or recount |
2सक सर एक सोषि सत सागर। तब भ्रातहि पूँछेउ नय नागर।।
English explanation
Rama can dry up a hundred oceans with a single arrow; yet, skilled in prudent conduct, he asked his brother for advice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सक | सकते हैं | can |
| सर | बाण से | with an arrow |
| एक | एक | one |
| सोषि | सुखा देना | dry up |
| सत | सौ | a hundred |
| सागर | समुद्र | oceans |
| तब | तब | then |
| भ्रातहि | भाई विभीषण से | his brother Vibhishana |
| पूँछेउ | पूछा | asked |
| नय | नीति में | in prudent conduct |
| नागर | निपुण राम | Rama, the adept |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.56
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 764
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 764, 765
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।