सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मास दिवस महुँ कहा न माना। तौ मैं मारबि काढ़ि कृपाना।।
मूल पाठ
मास दिवस महुँ कहा न माना। तौ मैं मारबि काढ़ि कृपाना।।
स्रोत अभिलेख 5.1 · पुस्तक पृ. 723, 724
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि महीनेभरमें यह कहा न माने तो मैं इसे तलवार निकालकर मार डालूँगा॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 723 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मास दिवस महुँ कहा न माना। तौ मैं मारबि काढ़ि कृपाना।।
English explanation
If Sita does not obey my words within a month, I will draw my sword and kill her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मास | एक महीने की | a month’s |
| दिवस | दिनों की अवधि | span of days |
| महुँ | के भीतर | within |
| कहा | मेरी कही बात | what I have said |
| न | नहीं | not |
| माना | मानी | obeyed |
| तौ | तो | then |
| मैं | मैं | I |
| मारबि | मार डालूँगा | will kill |
| काढ़ि | निकालकर | having drawn |
| कृपाना | तलवार | sword |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 723
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका अशोकवाटिकामें सीताको देखकर दु:खी होना और रावणका सीताजीको भय दिखलाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 723, 724
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।