सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा। जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[हनुमान्जीने कहा—] हे माता! मुझे कोई चिह्न (पहचान) दीजिये, जैसे श्रीरघुनाथजीने मुझे दिया था। तब सीताजीने चूड़ामणि उतारकर दी। हनुमान्जीने उसको हर्षपूर्वक ले लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 738 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा। जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा।।
चूड़ामनि उतारि तब दयऊ। हरष समेत पवनसुत लयऊ।।
स्रोत अभिलेख 5.27 · पुस्तक पृ. 738, 739
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा। जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा।।
English explanation
Mother, please give me a token of recognition, just as Rama gave me one.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | हे माता (सीता) | Mother (Sita), addressed respectfully |
| मोहि | मुझे | to me |
| दीजे | कृपया दीजिए | please give |
| कछु | कोई | some; a |
| चीन्हा | पहचान की निशानी | token of recognition |
| जैसें | जिस तरह | just as |
| रघुनायक | रघुवंश के नायक श्रीराम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| मोहि | मुझे | to me |
| दीन्हा | दिया था | gave |
2 चूड़ामनि उतारि तब दयऊ। हरष समेत पवनसुत लयऊ।।
English explanation
Then Sita removed her crest jewel and gave it to Hanuman, the wind-god’s son, who received it joyfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चूड़ामनि | सिर पर पहना जाने वाला रत्नाभूषण | crest jewel worn on the head |
| उतारि | उतारकर | having removed |
| तब | तब | then |
| दयऊ | दिया | gave |
| हरष | आनंद | joy |
| समेत | के साथ | with |
| पवनसुत | पवनपुत्र हनुमान | Hanuman, son of the wind-god |
| लयऊ | लिया | received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 738
- सहायक विषय
- लङ्का जलानेके बाद हनुमान्जीका सीताजीसे विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 738, 739
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।