सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा।।
मूल पाठ
कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा।।
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।
स्रोत अभिलेख 5.27 · पुस्तक पृ. 738, 739
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[जानकीजीने कहा—] हे तात! मेरा प्रणाम निवेदन करना और इस प्रकार कहना—हे प्रभु! यद्यपि आप सब प्रकारसे पूर्णकाम हैं (आपको किसी प्रकारकी कामना नहीं है), तथापि दीनों (दुखियों) पर दया करना आपका विरद है [और मैं दीन हूँ ] अत: उस विरदको याद करके, हे नाथ! मेरे भारी संकटको दूर कीजिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 738 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा।।
English explanation
Dear son, convey my respects and say this: ‘Lord, you are fulfilled in every respect.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेहु | कहना; पहुँचा देना | say; convey |
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| अस | इस प्रकार | thus; in these terms |
| मोर | मेरा | my |
| प्रनामा | प्रणाम; आदरपूर्वक अभिवादन | respectful salutation |
| सब | सभी | all; every |
| प्रकार | तरह से | in respect; in manner |
| प्रभु | हे स्वामी राम | Lord Rama |
| पूरनकामा | जिनकी सभी कामनाएँ पूर्ण हैं | whose wishes are all fulfilled |
2 दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।
English explanation
Remembering your renown for compassion toward the distressed, Lord, remove my grievous affliction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन | दुःखी और असहाय जन | the distressed and helpless |
| दयाल | दया करने वाले | compassionate toward |
| बिरिदु | प्रसिद्ध गुण; कीर्ति | renowned quality; reputation |
| संभारी | स्मरण करके | remembering |
| हरहु | दूर कीजिए | please remove |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| मम | मेरा | my |
| संकट | दुःख; विपत्ति | affliction; peril |
| भारी | अत्यंत बड़ा | grievous; severe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 738
- सहायक विषय
- लङ्का जलानेके बाद हनुमान्जीका सीताजीसे विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 738, 739
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।