सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात सक्रसुत कथा सुनाएहु। बान प्रताप प्रभुहि समुझाएहु।।
मूल पाठ
तात सक्रसुत कथा सुनाएहु। बान प्रताप प्रभुहि समुझाएहु।।
मास दिवस महुँ नाथु न आवा। तौ पुनि मोहि जिअत नहिं पावा।।
स्रोत अभिलेख 5.27 · पुस्तक पृ. 738, 739
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! इन्द्रपुत्र जयन्तकी कथा (घटना) सुनाना और प्रभुको उनके बाणका प्रताप समझाना [स्मरण कराना]। यदि महीनेभरमें नाथ न आये तो फिर मुझे जीती न पायेंगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 739 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तात सक्रसुत कथा सुनाएहु। बान प्रताप प्रभुहि समुझाएहु।।
English explanation
Dear son, recount the story of Indra’s son and remind the Lord of his arrow’s might.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| सक्रसुत | इंद्र का पुत्र जयंत | Jayanta, son of Indra |
| कथा | कथा; घटना का वृत्तांत | story; account of the incident |
| सुनाएहु | सुनाना | recount |
| बान | बाण का | of the arrow |
| प्रताप | प्रभाव; शक्ति | might; power |
| प्रभुहि | प्रभु राम को | to Lord Rama |
| समुझाएहु | स्मरण कराना | remind |
2 मास दिवस महुँ नाथु न आवा। तौ पुनि मोहि जिअत नहिं पावा।।
English explanation
If my Lord does not come within a month, he will no longer find me alive.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मास | एक महीने की | a month’s |
| दिवस | दिनों की अवधि | span of days |
| महुँ | के भीतर | within |
| नाथु | स्वामी राम | my Lord Rama |
| न | नहीं | not |
| आवा | आए | comes |
| तौ | तो | then |
| पुनि | फिर; उसके बाद | thereafter |
| मोहि | मुझे | me |
| जिअत | जीवित | alive |
| नहिं | नहीं | not |
| पावा | पाएँगे | will find |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 739
- सहायक विषय
- लङ्का जलानेके बाद हनुमान्जीका सीताजीसे विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 738, 739
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।