सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहु कपि केहि बिधि राखौं प्राना। तुम्हहू तात कहत अब जाना।।
मूल पाठ
कहु कपि केहि बिधि राखौं प्राना। तुम्हहू तात कहत अब जाना।।
तोहि देखि सीतलि भइ छाती। पुनि मो कहुँ सोइ दिनु सो राती।।
स्रोत अभिलेख 5.27 · पुस्तक पृ. 738, 739
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे हनुमान्! कहो, मैं किस प्रकार प्राण रखूँ! हे तात! तुम भी अब जानेको कह रहे हो। तुमको देखकर छाती ठंडी हुई थी। फिर मुझे वही दिन और वही रात!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 739 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहु कपि केहि बिधि राखौं प्राना। तुम्हहू तात कहत अब जाना।।
English explanation
Tell me, Hanuman, how can I keep myself alive? Dear son, now you too speak of leaving.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहु | बताओ | tell me |
| कपि | हे वानर हनुमान | Hanuman, addressed as the monkey |
| केहि | किस | what; which |
| बिधि | रीति से | by means; in a way |
| राखौं | मैं बचाए रखूँ | may I preserve |
| प्राना | अपने प्राण | my life |
| तुम्हहू | तुम भी | you too |
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| कहत | कह रहे हो | are speaking of |
| अब | अब | now |
| जाना | जाना; प्रस्थान करना | leaving; departing |
2 तोहि देखि सीतलि भइ छाती। पुनि मो कहुँ सोइ दिनु सो राती।।
English explanation
Seeing you brought relief to my heart; afterward, for me there will again be those same sorrowful days and nights.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोहि | तुम्हें | you |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सीतलि | शांत; संताप से मुक्त | soothed; relieved |
| भइ | हो गई | became |
| छाती | छाती; हृदय | chest; heart |
| पुनि | फिर | again; afterward |
| मो | मेरे | me |
| कहुँ | लिए | for |
| सोइ | वही | the very same |
| दिनु | दिन | day; days |
| सो | वही | the same |
| राती | रात | night; nights |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 739
- सहायक विषय
- लङ्का जलानेके बाद हनुमान्जीका सीताजीसे विदा माँगना और चूड़ामणि पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 738, 739
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।