सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी।।
मूल पाठ
ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी।।
क्रोधिहि सम कामिहि हरि कथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा।।
स्रोत अभिलेख 5.58 · पुस्तक पृ. 766, 767
भावार्थ
मूल पाठ के बादममतामें फँसे हुए मनुष्यसे ज्ञानकी कथा, अत्यन्त लोभीसे वैराग्यका वर्णन, क्रोधीसे शम (शान्ति) की बात और कामीसे भगवान्की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसरमें बीज बोनेसे होता है (अर्थात् ऊसरमें बीज बोनेकी भाँति यह सब व्यर्थ जाता है)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 766 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी।।
English explanation
Speaking of spiritual wisdom to someone absorbed in possessive attachment, and explaining detachment to someone exceedingly greedy, are likewise fruitless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ममता | मेरा-मेरा का मोह | possessive attachment |
| रत | में डूबे हुए व्यक्ति | one absorbed in |
| सन | को | to |
| ग्यान | आत्मज्ञान की | of spiritual wisdom |
| कहानी | बातें सुनाना | telling or discourse |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| लोभी | लोभी व्यक्ति | a greedy person |
| सन | को | to |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| बखानी | समझाना | explaining |
2 क्रोधिहि सम कामिहि हरि कथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा।।
English explanation
Teaching equanimity to an angry person and recounting Hari’s story to someone consumed by lust are as fruitless as sowing seed in barren soil.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| क्रोधिहि | क्रोधी व्यक्ति को | to an angry person |
| सम | समता या शांत समभाव की शिक्षा | equanimity or calm even-mindedness |
| कामिहि | कामासक्त व्यक्ति को | to a lust-driven person |
| हरि | भगवान हरि की | of Lord Hari |
| कथा | कथा सुनाना | recounting the story |
| ऊसर | बंजर भूमि में | in barren soil |
| बीज | बीज | seed |
| बएँ | बोने पर | when sown |
| फल | परिणाम | the result |
| जथा | जैसा | just as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 766
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती
- मुद्रित पृष्ठ
- 766, 767
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।