सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि रघुपति चाप चढ़ावा। यह मत लछिमन के मन भावा।।
मूल पाठ
अस कहि रघुपति चाप चढ़ावा। यह मत लछिमन के मन भावा।।
संघानेउ प्रभु बिसिख कराला। उठी उदधि उर अंतर ज्वाला।।
स्रोत अभिलेख 5.58 · पुस्तक पृ. 766, 767
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा कहकर श्रीरघुनाथजीने धनुष चढ़ाया। यह मत लक्ष्मणजीके मनको बहुत अच्छा लगा। प्रभुने भयानक [अग्रि] बाण सन्धान किया, जिससे समुद्रके हृदयके अंदर अग्रिकी ज्वाला उठी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 766 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस कहि रघुपति चाप चढ़ावा। यह मत लछिमन के मन भावा।।
English explanation
Having said this, Rama, lord of Raghu’s lineage, readied his bow. This decision pleased Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| चाप | धनुष | the bow |
| चढ़ावा | चढ़ाया, प्रयोग के लिए तैयार किया | readied for use |
| यह | यह | this |
| मत | विचार या निर्णय | decision or resolve |
| लछिमन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| के | के | of |
| मन | मन को | to the mind |
| भावा | अच्छा लगा | was pleasing |
2 संघानेउ प्रभु बिसिख कराला। उठी उदधि उर अंतर ज्वाला।।
English explanation
Lord Rama fitted and aimed a dreadful arrow; a blaze arose within the ocean’s heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संघानेउ | संधान किया, बाण चढ़ाकर निशाना साधा | fitted and aimed |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| बिसिख | बाण | arrow |
| कराला | भयानक | dreadful |
| उठी | उठी | arose |
| उदधि | समुद्र के | of the ocean |
| उर | हृदय | heart |
| अंतर | के भीतर | within |
| ज्वाला | अग्नि की लपट | a blaze |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 766
- सहायक विषय
- समुद्रपर श्रीरामजीका क्रोध और समुद्रकी विनती
- मुद्रित पृष्ठ
- 766, 767
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।