सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मन संतोष सुनत कपि बानी। भगति प्रताप तेज बल सानी।।
मूल पाठ
मन संतोष सुनत कपि बानी। भगति प्रताप तेज बल सानी।।
आसिष दीन्हि रामप्रिय जाना। होहु तात बल सील निधाना।।
स्रोत अभिलेख 5.17 · पुस्तक पृ. 730, 730
भावार्थ
मूल पाठ के बादभक्ति, प्रताप, तेज और बलसे सनी हुई हनुमान्जीकी वाणी सुनकर सीताजीके मनमें सन्तोष हुआ। उन्होंने श्रीरामजीके प्रिय जानकर हनुमान्जीको आशीर्वाद दिया कि हे तात! तुम बल और शीलके निधान होओ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 730 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मन संतोष सुनत कपि बानी। भगति प्रताप तेज बल सानी।।
English explanation
Hearing Hanuman’s words, imbued with devotion, majesty, radiance, and strength, Sita felt reassured.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन में | in the heart |
| संतोष | संतोष हुआ | reassurance arose |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| कपि | हनुमान की | of Hanuman, the monkey messenger |
| बानी | वाणी | words |
| भगति | भक्ति | devotion |
| प्रताप | प्रताप | majesty |
| तेज | तेज | radiance |
| बल | बल | strength |
| सानी | से सनी हुई | imbued with |
2 आसिष दीन्हि रामप्रिय जाना। होहु तात बल सील निधाना।।
English explanation
Recognizing Hanuman as dear to Rama, Sita blessed him: “Dear son, become a treasury of strength and noble conduct.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसिष | आशीर्वाद | a blessing |
| दीन्हि | दिया | gave |
| रामप्रिय | राम के प्रिय | dear to Rama |
| जाना | जानकर | recognizing him as |
| होहु | होओ | may you become |
| तात | हे पुत्र | dear son |
| बल | बल के | of strength |
| सील | शील के | of noble conduct |
| निधाना | भंडार | a treasury |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 730
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 730, 730
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।