सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुँ बहुत रघुनायक छोहू।।
मूल पाठ
अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुँ बहुत रघुनायक छोहू।।
करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना। निर्भर प्रेम मगन हनुमाना।।
स्रोत अभिलेख 5.17 · पुस्तक पृ. 730, 730
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पुत्र! तुम अजर (बुढ़ापेसे रहित), अमर और गुणोंके खजाने होओ। श्रीरघुनाथजी तुमपर बहुत कृपा करें। 'प्रभु कृपा करें ऐसा कानोंसे सुनते ही हनुमान्जी पूर्ण प्रेममें मग्र हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 730 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अजर अमर गुननिधि सुत होहू। करहुँ बहुत रघुनायक छोहू।।
English explanation
“Son, may you be free from aging, immortal, and a treasury of virtues; may Rama, lord of the Raghu line, show you great affection.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अजर | बुढ़ापे से रहित | free from aging |
| अमर | मृत्यु से रहित | immortal |
| गुननिधि | गुणों के भंडार | a treasury of virtues |
| सुत | हे पुत्र | O son |
| होहू | होओ | may you be |
| करहुँ | करें | may he show |
| बहुत | बहुत | great |
| रघुनायक | रघुवंश के नायक राम | Rama, lord of the Raghu line |
| छोहू | स्नेह | affection |
2 करहुँ कृपा प्रभु अस सुनि काना। निर्भर प्रेम मगन हनुमाना।।
English explanation
Hearing “May the Lord bestow grace,” Hanuman became absorbed in profound love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहुँ | करें | may he bestow |
| कृपा | कृपा | grace |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| अस | ऐसा | thus |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| काना | कानों से | with his ears |
| निर्भर | प्रगाढ़ | profound |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| हनुमाना | हनुमान | Hanuman |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 730
- सहायक विषय
- हनुमान्जीद्वारा अशोकवाटिका-विध्वंस, अक्षयकुमार-वध और मेघनादका हनुमान्जीको नागपाशमें बाँधकर सभामें ले जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 730, 730
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।