सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा।।
मूल पाठ
बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा।।
प्रभु कर पंकज कपि कें सीसा। सुमिरि सो दसा मगन गौरीसा।।
स्रोत अभिलेख 5.33 · पुस्तक पृ. 743, 744
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु उनको बार-बार उठाना चाहते हैं, परन्तु प्रेममें डूबे हुए हनुमान्जीको चरणोंसे उठना सुहाता नहीं। प्रभुका कर-कमल हनुमान्जीके सिरपर है। उस स्थितिका स्मरण करके शिवजी प्रेममग्र हो गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 743 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा।।
English explanation
Lord Rama repeatedly wishes to raise Hanuman, but Hanuman, absorbed in love, does not wish to get up.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार; अगले ‘बार’ के साथ बार-बार | time; with the next word, repeatedly |
| बार | बार; पिछले ‘बार’ के साथ बार-बार | time; with the preceding word, repeatedly |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| चहइ | चाहते हैं | wishes |
| उठावा | उठाना | to raise him |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| तेहि | उन्हें; हनुमान को | to him, Hanuman |
| उठब | उठना | getting up |
| न | नहीं | not |
| भावा | अच्छा लगा | was pleasing |
2 प्रभु कर पंकज कपि कें सीसा। सुमिरि सो दसा मगन गौरीसा।।
English explanation
The Lord’s lotus-like hand rests on Hanuman’s head. Recalling that scene, Shiva, Gauri’s husband, becomes absorbed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम का | Lord Rama’s |
| कर | हाथ | hand |
| पंकज | कमल; हाथ की कमल-समानता | lotus, describing the lotus-like hand |
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey |
| कें | के | of |
| सीसा | सिर पर | on the head |
| सुमिरि | स्मरण करके | recalling |
| सो | उस | that |
| दसा | दशा; दृश्य | state; scene |
| मगन | मग्न हो गए | became absorbed |
| गौरीसा | गौरी के पति शिव | Shiva, husband of Gauri |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 743
- सहायक विषय
- समुद्रके इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन-प्रवेश, सुग्रीव-मिलन, श्रीराम-हनुमान्-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 743, 744
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।