सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कौसलपुर राजा।।
मूल पाठ
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कौसलपुर राजा।।
गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।
स्रोत अभिलेख 5.5 · पुस्तक पृ. 719, 719
भावार्थ
मूल पाठ के बादअयोध्यापुरीके राजा श्रीरघुनाथजीको हृदयमें रखे हुए नगरमें प्रवेश करके सब काम कीजिये। उसके लिये विष अमृत हो जाता है, शत्रु मित्रता करने लगते हैं, समुद्र गायके खुरके बराबर हो जाता है, अग्रिमें शीतलता आ जाती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 719 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कौसलपुर राजा।।
English explanation
AI draft: Enter the city and accomplish all your tasks, keeping Rama, king of Ayodhya, in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रबिसि | प्रवेश करके | having entered |
| नगर | नगर में | the city |
| कीजे | करो | do; accomplish |
| सब | सभी | all |
| काजा | कार्य | tasks |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| राखि | रखकर | keeping |
| कौसलपुर | अयोध्या के | of Ayodhya |
| राजा | राजा राम | King Rama |
2 गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।
English explanation
Poison becomes nectar, enemies become friendly, the ocean becomes like a cow’s hoofprint, and fire becomes cool.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गरल | विष | poison |
| सुधा | अमृत | nectar |
| रिपु | शत्रु | enemies |
| करहिं | करते हैं | practice; make |
| मिताई | मित्रता | friendship |
| गोपद | गाय के खुर का छोटा गड्ढा | a small cow-hoof depression |
| सिंधु | समुद्र | ocean |
| अनल | अग्नि | fire |
| सितलाई | शीतलता | coolness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 719
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 719, 719
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।