सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर हे गरुडज़ी! सुमेरु पर्वत उसके लिये रजके समान हो जाता है, जिसे श्रीरामचन्द्रजीने एक बार कृपा करके देख लिया। तब हनुमान्जीने बहुत ही छोटा रूप धारण किया और भगवान्का स्मरण करके नगरमें प्रवेश किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 719 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही।।
अति लघु रूप धरेउ हनुमाना। पैठा नगर सुमिरि भगवाना।।
स्रोत अभिलेख 5.5 · पुस्तक पृ. 719, 719
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही।।
English explanation
For the person upon whom Rama casts a gracious glance, even Mount Sumeru is like a speck of dust. The supplied ‘गरुड़’ is uncertain here; if ‘गरुअ,’ meaning heavy, was intended, the sense is ‘even massive Sumeru is like a speck of dust.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गरुड़ | भारी या विशाल; यहाँ सुमेरु पर्वत का विशेषण। | Heavy or massive, describing Mount Sumeru. |
| सुमेरु | सुमेरु पर्वत | Mount Sumeru |
| रेनू | धूल का कण | a speck of dust |
| सम | के समान | like; equal to |
| ताही | उसके लिए | for that person |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कृपा | कृपा | grace; compassion |
| करि | करके | showing |
| चितवा | दृष्टि डालते हैं | casts a glance |
| जाही | जिस पर | upon whom |
2 अति लघु रूप धरेउ हनुमाना। पैठा नगर सुमिरि भगवाना।।
English explanation
Hanuman assumed a very small form and entered the city, remembering the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | very; exceedingly |
| लघु | छोटा | small |
| रूप | आकार | form |
| धरेउ | धारण किया | assumed |
| हनुमाना | हनुमान | Hanuman, Rama’s messenger |
| पैठा | प्रवेश किया | entered |
| नगर | नगर में | the city |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| भगवाना | भगवान राम | the Lord, Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 719
- सहायक विषय
- लङ्कावर्णन, लङ्किनीपर प्रहार, लङ्कामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 719, 719
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।