सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजनु मोर तेहि भाव न काऊ।।
मूल पाठ
पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजनु मोर तेहि भाव न काऊ।।
जौं पै दुष्टहदय सोइ होई। मोरें सनमुख आव कि सोई।।
स्रोत अभिलेख 5.44 · पुस्तक पृ. 754, 754
भावार्थ
मूल पाठ के बादपापीका यह सहज स्वभाव होता है कि मेरा भजन उसे कभी नहीं सुहाता। यदि वह (रावणका भाई) निश्चय ही दुष्ट हृदयका होता तो क्या वह मेरे सम्मुख आ सकता था?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 754 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पापवंत कर सहज सुभाऊ। भजनु मोर तेहि भाव न काऊ।।
English explanation
It is the natural disposition of one steeped in sin never to find devotion to me pleasing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पापवंत | पाप में रत व्यक्ति | one steeped in sin |
| कर | का | of |
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| सुभाऊ | स्वभाव | disposition |
| भजनु | भजन | devotional worship |
| मोर | मेरा | of me |
| तेहि | उसे | to him |
| भाव | भाता है | is pleasing |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
2 जौं पै दुष्टहदय सोइ होई। मोरें सनमुख आव कि सोई।।
English explanation
If he truly had an evil heart, would he come turning toward me?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| पै | वास्तव में | indeed |
| दुष्टहदय | दुष्ट हृदय वाला | evil-hearted |
| सोइ | वह | he |
| होई | होता | were |
| मोरें | मेरी ओर | toward me |
| सनमुख | उन्मुख | turned toward |
| आव | आता | would come |
| कि | क्या | would …? |
| सोई | वही व्यक्ति | that very person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 754
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 754, 754
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।