सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा।।
मूल पाठ
निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा।।
भेद लेन पठवा दससीसा। तबहुँ न कछु भय हानि कपीसा।।
स्रोत अभिलेख 5.44 · पुस्तक पृ. 754, 754
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मनुष्य निर्मल मनका होता है, वही मुझे पाता है। मुझे कपट और छल-छिद्र नहीं सुहाते। यदि उसे रावणने भेद लेनेको भेजा है, तब भी हे सुग्रीव! अपनेको कुछ भी भय या हानि नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 754 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा।।
English explanation
The person whose mind is pure attains me. Hypocrisy, deceit, and hidden faults do not please me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निर्मल | शुद्ध | pure |
| मन | मन | mind |
| जन | व्यक्ति | person |
| सो | वही | that person |
| मोहि | मुझे | me |
| पावा | पाता है | attains |
| मोहि | मुझे | to me |
| कपट | कपट | hypocrisy |
| छल | धोखा | deceit |
| छिद्र | भीतर के दोष | hidden faults |
| न | नहीं | not |
| भावा | भाते हैं | are pleasing |
2 भेद लेन पठवा दससीसा। तबहुँ न कछु भय हानि कपीसा।।
English explanation
Even if Ravana has sent him to discover our secrets, there is no cause for fear or harm, O king of the monkeys.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भेद | गुप्त जानकारी | secrets |
| लेन | लेने के लिए | to obtain |
| पठवा | भेजा है | has sent him |
| दससीसा | दस सिरों वाला रावण | Ravana, the ten-headed king |
| तबहुँ | तब भी | even then |
| न | नहीं | no |
| कछु | कुछ भी | any |
| भय | भय | fear |
| हानि | हानि | harm |
| कपीसा | हे वानरराज सुग्रीव | O Sugriva, king of the monkeys |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 754
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 754, 754
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।